Monday, December 18, 2017
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राजधानी में चले वाले मेट्रो का रास्ता आसान नहीं

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भोपाल। मेट्रो के लिए जायका की टीम का फोकस मेट्रो की डीपीआर बदलाव के साथ साथ लोन की शर्त के तहत 30 फीसदी तकनीकी सामान की खरीदी जापान से होने पर भी है। इस शर्तपर ही 13 हजार करोड़ रूपये का लोन टिका है। जापान से मिलने वाला सामान अत्याधुनिक होगा या पुराना यह अभी तक स्पष्ट नहीं होपायाहै।  कारपोरेशन के सदस्यों का अलग रवैया है। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि शर्तों में तो मेट्रो का कम उलझ सकता है क्योंकि आधा सामान जापान से ही खरीदना होगा जापानी कंपनियां हमें पुरानी तकनीक का सामान और ट्रेन बेचना चाहती है, उनकी क्षमता 120 मीटर टर्निंग रेडियस से कम वाले ट्रैक पर चलने की नहीं है, जबकि डीपीआर तैयार करने वाले जर्मन एक्सपर्ट ने भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सबसे आधुनिक तकनीक वाली मेट्रो रेल के लिए ट्रैक तैयार किया है, जिसके चलते हमें भी अत्याधुनिक नई तकनीक के सामान की जरूरत पड़ेगी। इस संबंध में भी अभी तक पूरी सहमति नहीं बन पायी है। 
 इससे पहले पहले शहर की स्थिति का जायजा लेने के लिए आयी जापान इंटरनेशनल कारपारेशन जायका की टीम आज नगरीय विकास संचालनालय में भोपाल की 16 लोकेशन पर देखी मेट्रो ट्रेन की डीपीआर की जमीनी हकीकत पर विचार विमर्श करेगी। इसमें मुख्य रूप से मेट्रो लाइन के पास की झुग्गियों की शिफ्ंिटग और रूट टर्निंग एरिया पर भी फोकस होगा। गौर तलब है मेट्रो की डीपीआर में पुराने शहर में जिंसी तिराहा व चिकलोद रोड के मकान तोड़ने  की बात का जिक्र नहीं किया गया था जबकि वह  प्रस्तावित मेट्रो ट्रेक के कर्व से टच हो रहा है। इसी तरह से  चिकलोद रोड पर लिली टॉकीज से बोगदा पुल तक के 2.5 किमी के हिस्से में सड़क की चौड़ाई 12 से 15 मीटर के बीच है जबकि जरूरत 20 मीटर की है। अब इस अंतर को किस तरह से पाटा जाएगा इसका जवाब आज जायका के सदस्य नगरीय विकास संचालनालय के अफसरों के साथ मिल कर तलाशेंगे। 
सीएस से नहीं हो पायी मुलाकात 
दो दिन से शहर में आयी जायका की टीम मेट्रो लोन और इसकी डीपीआर के संबंध में मुख्य सचिव एंटोनी डिसा से मुलाकात नहीं हो पायी है। टीम की सीएम सेपहले सौजन्य मुलाकात होनी थी उसके बाद वह डीपीआर और मैदानी रिपोर्ट को लेकर मिलते। पर सीएस से यह मुलाकात तय नहीं हो पायी है। नगरीय विकास संचालनालय के सूत्रों का कहना है कि सीएस अभी वैचारिक कुंभ और अन्य कार्यों में व्यस्त हैं इसलिए जायका की टीम को शहर में मेट्रो के मूवमेंट और उनकी क्वारीज को दूर करने में लगाया गया है। जायका की आपत्तियों को दूर करने के बाद उसके सदस्यों की कल सीएस से मुलाकात हो सकती है। 
शर्तो के बाद ही लोन होगा । 
मेट्रो ट्रेक की टर्निंग के लिए नहीं तोड़ेंगे कोई मकान
    मेट्रो की डीपीआर में जहां-जहां मेट्रो ट्रैक पर 100 मीटर रेडियस के कर्व (मोड़) प्रस्तावित हैं, जायका उन्हें इसलिए देखना चाहती थी क्योंकि उन्हें आशंका थी कि इन स्थलों पर मकान तोड़ने पड़ेंगे, यदि ऐसा हुआ तो स्थानीय लोगों का विरोध और कानूनी विवाद पैदा हो सकता है हमने उन्हें ऐसे सभी स्थान ले जाकर दिखा दिए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं तोड़ी जाएगी इस विजिट को लेकर जायका का उद्देश्य मेट्रो की कमर्शियल फिजिबिलिटी को परखना और टेक्निकल कॉस्ट को कैसे कम किए जाए।ञ  जितेंद्र दुबे, ईएनसी,मप्र मेट्रो रेल कंपनी लिमिटेड का कहना है कि जापानियों को समझाने के लिए जर्मनी से बुलाए एक्सपर्टजापानी एक्सपर्ट की जिज्ञासाओं को दूर करने के लिए डीपीआर तैयार करने वाली फर्म रोहित एसोसिएट्स ने जर्मनी से तीन एक्सपर्ट बुलाए हैं इसमें एलाइनमेंट एक्सपर्ट मेनफील्ड वेइडमैन और रोलिंग एलाइनमेंट और वर्कशॉप एक्सपर्ट मार्क हेरकेनार्थ ने जायका टीम की अलाइनमेंट से जुड़ी जिज्ञासाओं को  दूर करने का प्रयास किया है।

 

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