Monday, December 18, 2017
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2 साल से रिहायशी इलाकों में चल रहे थे एक्सचेंज, लोकल पुलिस

2 साल से रिहायशी इलाकों में चल रहे थे एक्सचेंज, लोकल पुलिस को नहीं लगी भनक
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भोपाल (ए)। सेना की खुफिया जानकारी जुटाने के आईएसआई के नेटवर्क के बारे में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। प्रदेश भर में ऐसे 13 पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज होने का पता चला है। इनमें सबसे ज्यादा छह तो सिर्फ भोपाल में ही चल रहे थे। दो एमपी नगर, एक बीयू के सामने, एक अशोका गार्डन, एक मिनाल और एक साकेत नगर से चलाया जा रहा था। एंटी टेररिस्ट स्कवॉड (एटीएस) ) का दावा है कि चाइनीज सिमबॉक्स के जरिए पढ़े-लिखे कम उम्र के लोग ही इनका संचालन कर रहे थे। खास बात यह है कि दिनों-दिन यह नेटवर्क बढ़ता ही जा रहा था और ये एक्सचेंज रिहाइशी इलाकों में चलाए रहे थे। इसके बावजूद लोकल पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।  एटीएस अफसरों ने प्रदेश के दूसरे शहरों में भी इस तरह के पैरेलल एक्सचेंज होने से इंकार नहीं किया है। 
बलराम के पास पाकिस्तान के सौ नंबरों से आते थे कॉल...
आईएसआई के लिए काम कर रहे सतना के बलराम के पास पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से सीधे कॉल आते थे। एटीएस को ऐसे सौ से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जानकारी है। सैकड़ों बार उससे इंटरनेट कॉल को मोडिफाई कर भी बात करवाई गई। एक साल में उसने मोबाइल नंबर पर ऐसे 250 से ज्यादा कॉल अटेंड किए हैं।  2010 में वह दुबई गया था। वहां ड्राइवर की नौकरी की। 2013 में वह  आईएसआई एजेंट के कॉन्टेक्ट में आया। कॉल के दौरान वह अक्सर किसी को भाईजान कहकर बात करता था।
600 में बेचते थे सिमकार्ड
एटीएस सूत्रों ने बताया कि मनीष गांधी द्वारा ध्रुव सक्सेना और मोहित अग्रवाल को बेचे गए करीब डेढ़ सौ सिमकार्ड की बात कंफर्म हो चुकी है। ग्वालियर से पकड़े गए जितेंद्र यादव ने भी ध्रुव और मोहित को इस धंधे के लिए 350 से ज्यादा सिमकार्ड बेचे हैं। 
ये दोनों एक सिमकार्ड के लिए 600 रुपए तक लेते थे। 600 रु. में उन्हें एक्टिवेटेड पोस्टपेड सिमकार्ड देना होता था।
पहले एनालॉग फिर सिम बॉक्स लिया
ध्रुव सक्सेना मुंबई के एक दोस्त से 2015 में सिम बॉक्स (गेटवे) लाया था। इससे पहले एनालॉग के जरिए कॉलसेंटर चलाया जाता था।  इसमें आवाज साफ न आने की शिकायतें मिलीं तो आरोपियों ने करीब एक लाख रुपए कीमत का सिम बॉक्स लगाना शुरू कर दिया। एटीएसअब तक 35 सिम बॉक्स जब्त कर चुकी है। ये सभी दुबई और चाइना से मंगाए गए थे।
बैक से पूछा- अकाउंट में कितने पैसे?
इस मामले मे एटीएस के सौ से ज्यादा लोगों की आठ टीमें काम कर रही है। इनमें 30 से ज्यादा लोग केवल टेकनिकल काम देख रहे हैं।  जबकि, करीब 70 लोग प्रदेश की 13 अलग-अलग लोकेशंस पर धरपकड़ और पूछताछ में लगे हैं। अब तक पकड़े गए आरोपियों ने हाल ही में महंगी गाडिय़ां कब और कैसे खरीदीं? इन्होंने बैंक से लोन भी लिया है क्या? और उनके कितने बैंक खातों में कितनी रकम जमा है? इसके लिए टीम ने तकरीबन सभी बैंकों से जानकारी मांगी है।
बड़े बेटे मयंक से भी नहीं हो रहा संपर्क
आईएसएस के लिए पैरेलल एक्सचेंज चलाने के आरोप में गिरफ्तार ध्रुव मूल रुप से छतरपुर का रहने वाला है। वह कवयित्री रजनी और अजय मोहन सक्सेना का बेटा है। रजनी ने बताया उनके दोनों बेटे भोपाल में साथ में रहते थे। छोटे बेटा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है लेकिन बड़ा बेटा मयंक का कोई पता नहीं चल रहा है। उसका मोबाइल भी बंद है।  उनको आशंका है कि ध्रुव को गिरफ्तार किए जाने के बाद या तो मयंक डर के मारे कहीं भाग गया है या फिर उसे भी ्रञ्जस् ने हिरासत में लिया होगा। साथ ही रजनी ने बताया कि वे आयशा नाम की लड़की को नहीं जानती।
2 दिन बाद दर्ज कराई जितेंद्र की गुमशुदगी
आईएसएस के लिए मुखबिरी के आरोप में पकड़े ग्वालियर के जनकगंज में रहने वाले जिस युवक को जितेंद्र यादव बताया जा रहा है, वह जितेंद्र जाटव है और टाटा डोकोमो कंपनी में रिकवरी एजेंट था।  जितेंद्र की पत्नी कृष्णा जाटव ने एसपी को लेटर देकर कहा है कि कंपनी के ब्रांच मैनेजर और रिपोर्टिंग मैनेजर अंकित गुप्ता जितेंद्र को परेशान कर रहे थे। 9 फरवरी को जनकगंज पुलिस थाने में जितेंद्र की गुमशुदगी दर्ज कराई। फिर कंपनी के दफ्तर में सख्ती से पूछताछ की तो बताया कि जितेंद्र को भोपाल से आई एटीएस की टीम पकड़कर ले गई है।
18 दिन पहले हो जाता नेटवर्क का खुलासा
24 जनवरी को यूपी एटीएस ने 11 आईएसएस एजेंट यूपी में तमाम ठिकानों से पकड़े। इनका ग्वालियर लिंक मिला था तभी ग्वालियर पुलिस की टीम वहां पहुंची, लेकिन पुलिस ने इस पर ठीक से काम नहीं किया। यूपी पुलिस के एंटी टेरेरिस्ट स्कवॉड ने 18 दिन पहले ही मप्र जैसा आईएसआई एजेंटों का नेटवर्क बर्स्ट किया था।

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