Monday, December 18, 2017
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धूमधाम से मनाया गया शंकराचार्य जी का प्राकट्योत्सव

धूमधाम से मनाया गया शंकराचार्य जी का प्राकट्योत्सव
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द्वारका, निप्र। अनंतश्री विभूषित द्वारकाशारदापीठाधीश्वर एवं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का 94 वां प्राकट्योत्सव धूमधाम धाम से गुजरात के द्वारका में मनाया जा रहा है । इस त्रिदिवसीय कार्यक्रम में आज दूसरे दिन जाने माने कथावाचक विद्वान रमेशभाई ओझा ने दीप प्रज्वलन किया। 
भाई श्री ने कहा कि धर्म की रक्षा हेतु चारो पीठ सदैव अत्यन्त जाग्रत है। मन माने ढंग से धर्म की व्याख्या नही की जा सकती हैं। अत: हम जो मानें वह धर्म नही हैं। अपितु धर्म के अनुसार मनुष्य को चलना पड़ता है। 
पूज्य महाराज जी ऐतिहासिक महापुरुष है। वेदों के अनुसार शंकारचार्य ही साक्षात शंकर है ।
आज पूज्य महाराजश्री के 94वें व प्राकट्योत्सव पर अपने आर्शीवचन उद्बोधन में पूज्य महाराज जी ने कहा कि दुनिया मे जिसे धर्म कहते है वह वस्तुत: पंथ है धर्म का स्वरूप तो सनातन धर्म ही है। सर्वधर्म समभाव की बात हास्यास्पद है । 
कलियुग के पाखंड का खंडन व शास्त्रो का मंडन आवश्यक है। हम धर्म उसे कहते है जो वेद को मान्य है। जो वेद निंदा करता है और वैदिक सिद्धांत के विरुद्ध हो वह अधर्म है। जिसे सनातन धर्म मे कोई स्थान नही है।
रमेश ओझा सहित देश भर से आये हुए सैकड़ो ब्रह्मचारी साधु संतों ने महाराज जी का पूजन माल्यार्पण व दीर्घायु की कामना और गुरुभक्तों ने वंदना की।

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