उज्जैन का पहला रेडियो: रेडियो दस्तक हुआ लोकप्रिय

उज्जैन। उज्जैन का पहला रेडियो स्टेशन रेडियो दस्तक 90.8 एफ एम इसी वर्ष 26 जनवरी से शुरू हो चुका है। उज्जैन के पहले सामुदायिक रेडियो होने का गौरव हासिल किया है आपके अपने इस रेडियो दस्तक ने। यह रेडियो दस्तक 90.8 एफ एम पर सुना जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य उज्जैन एवं उज्जैन के लोगों का विकास है। इसी लिए इसका ध्येयवाक्य सुनेगा उज्जैन, बढ़ेगा उज्जैन है। रेडियो दस्तक के माध्यम से उज्जैन की प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जायेगा।
उज्जैन का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। उज्जैन को देश प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। ऐसे में उज्जैन के लोगों के मन में इच्छा थी कि उज्जैन का अपना रेडियो स्टेशन हो जिसमें उज्जैन के लोगो की मन की बात आ सके वे अपने बारे में बात कर सके। मालवा की संस्कृति के कार्यक्रम बनाये जा सके उज्जैन की प्रतिभाओं को मंच मिल सके। रेडियो दस्तक उज्जैन के नागरिकांे का ही अपना रेडियो स्टेशन है। इस स्टेशन के माध्यम से युवाओं को उज्जैन शहर में न केवल मंच मिला है बल्कि बढ़ते हुए रेडियो कल्चर के बीच जाॅब का भी एक बड़ा माध्यम विकसित हुआ है। रेडियो दस्तक कई तरह की स्किल वर्कशॅाप आयोजित करेगा।जिसमें महत्वपूर्ण रूप से रेडियो जाॅकी, स्क्रीप्ट राईटिंग, आॅडियो एडिटिंग, रेडियो प्रोडक्शन , इवेन्ट आर्गेनाईजिंग, स्टेशन मेनेजमेंट, मार्केटिंग जैसी महत्वपूर्ण रोजगार मूलक ट्रेनिंग होगी। इससे शहर के युवा आत्मनिर्भर बनेंगे। ये रेडियो स्टेशन शहर को सफलता के नये आयाम प्रदान करेगा। इससे उज्जैन शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण अंचलो को भी अनेक लाभ होंगे। क्योकि यह मालवा संस्कृति से जुड़ा है। आपके अपने इस रेडियो में आमजन से संबंधित आमजन के द्वारा ही अनेक प्रोग्राम कियेजायेंगे।जिससे आम लोगों को अपने मन की बात लोगों तक पहुंचाने का अवसर प्राप्त होता है।
उज्जैन की जानी मानी संस्था श्री कृष्ण शिक्षण लोकपरमार्थ समिति द्वाराइलेक्ट्राॅनिक मीडिया, मास कम्यूनिकेशन, जर्नलिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे है। उज्जैन की महत्वपूर्ण आवश्यकता को देखते हुए श्री कृष्ण शिक्षण लोक परमार्थ समिति ने उज्जैन के पहले कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन को प्रारंभ किया। आज यह रेडियो दस्तक उज्जैन की आवाज बनता जा रहा है। नये युवा इसे अपनी आवाज दे रहे है। इसका मेनेजमेंट कर रहे है। इसमें प्रोग्राम प्रोडक्शन कर रहे है। पिछले 60 वर्षांे से शैक्षणिक पहचान बनाने वाली संस्था श्रीपाल एज्यूकेशन सोसायटी और भारतीय ज्ञानपीठ इसकी सहयोगी संस्थाएं है। प्रसिद्ध गांधीवादी एवं वरिष्ठ अभिभाषक श्री कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ के नेतृत्व में यह संस्था नए आयाम गढ़ रही है।