सरकार की मंशा को शिक्षक लगा रहे पलीता

आदिवासी विद्यार्थियों से पढ़ाई के स्थान पर झाड़ू, बर्तन धुलाई,पानी डुलवाने का कर रहे कार्य

सारनी. जिले में सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की सुब्रतकर के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बढ़ाने की योजना सरकार कर रही है. लेकिन सरकार की इन सारी योजनाओं को सरकारी स्कूल के शिक्षक पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं. सबसे ज्यादा बुरी स्थिति ट्रेवल्स के शासकीय स्कूलों की है. आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाना छोड़कर लगभग सभी काम विद्यार्थियों से ही करवाए जाते हैं कुछ इसी तरह का मामला शोभापुर गांव के अंतर्गत संचालित होने वाले प्राथमिक शाला में मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों के माध्यम से स्कूल ग्राउंड में झाड़ू लगवाने,मध्यान भोजन की थाली धुलाई जाने, 300 मीटर दूरी पर लगे हेडपम्प से बच्चों को पानी मंगवाने का मामला प्रकाश में आया है. शोभापुर गांव के समाजसेवी लक्ष्मण नर्रे, रोहित खंडेलवाल ने बताया कि इस स्कूल का संचालन आदिवासी कल्याण विभाग के माध्यम से किया जा रहा है.इस स्कूल में ज्यादातर आदिवासी विद्यार्थी ही पढ़ाई करते हैं.इस वजह से आदिवासी विद्यार्थियों से प्रतिदिन मध्यान भोजन बनाने के बर्तन व थाली धुलाई जाती है. स्कूल प्रांगण में झाड़ू लगवाई जाता है, 300 मीटर दूर से लगे हैंडपंप से पानी मंगवाया जाता है. ऐसा नहीं कि इस तरह का मामला केवल शुभम पुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव में ही हुआ है इस तरह की स्थिति लगभग संपूर्ण जिलों में प्रकाश में आई. उसके बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शिक्षकों पर किसी भी तरह की कार्रवाई न करना उनकी कार्यप्रणाली एवं उनके सय को बढ़ावा दे रहा है. किस तरह शिक्षक आदिवासी समाज के विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित करने का कार्य कर रहे हैं.आश्चर्य की बात तो यह है कि यह कार्य एक दो दिन का नहीं बल्कि प्रतिदिन विद्यार्थियों को स्कूल में आने के पहले एक दिन पुरानी थाली धोनी पड़ती है.झाड़ू लगवाई जाती है, पानी मंगवाया जाता है. उसके बाद भोजन करने के बाद ये थाली दोबारा धोकर मध्यान भोजन बनाने वाले कक्ष में रखा जाता है.ऐसा भी नहीं कि इसकी जानकारी स्कूल के प्रधान पाठक को ना हो.उसके बाद भी प्रधान पाठक के माध्यम से बच्चों से कार्य कराने वाले शिक्षक एवं मध्यान भोजन बनाने वाली महिलाओं एवं संस्थाओं पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है. आदिवासी अंचलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार हो सके इसे देखते हुए मध्यान्ह भोजन बनाने का कार्य स्व सहायता समूह को सौंपा गया है. लेकिन स्व सहायता समूह में काम करने वाली महिलाएं ही आदिवासी विद्यार्थियों से भोजन करने के बाद थाली को धोकर रखने का फरमान जारी करती है. गांव की कुछ जागरूक युवकों के माध्यम से इस तरह की फोटो को व्हाट्सएप सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के अलावा जिला कलेक्टर को भेजकर कार्रवाई की मांग की गई.

इनका कहना है

टेबल्स के माध्यम से संचालित शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों से किसी भी तरह का कार्य नहीं करवाया जा सकता.यदि उसके बाद भी नियमों को ताक पर रखकर विद्यार्थियों से कार्य करवाया गया है तो इसकी जांच कर नियम अनुसार संकुल प्रभारी पर कार्रवाई की जाएगी

दिनेश मानकर
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी घोड़ाडोंगरी