सिंधिया-नाथ की मुलाकात से बने नए समीकरण

कम होता दिख रहा मनमुटाव
नई दिल्ली । मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच खींचतान, मनमुटाव और दूरियां कम होती दिख रही है। इसकी शुरुआत पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से हुई, जिन्होंने मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। कांग्रेस नेतृत्व ने बारी-बारी राज्य के तीनों गुटों के नेताओं कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय सिंह से बातचीत की थी। इसके बाद नेताओं की एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और शिकायतों के बाद मामला अनुशासन समिति को सौंपा गया है। पिछले दिनों कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में सोनिया गांधी ने सरकार और संगठन के बीच तालमेल बैठाने और आपस में बैठक कर जनता से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के निर्देश दिए थे। सिंधिया की कमलनाथ से मुलाकात के पीछे का कारण उनके क्षेत्र से संबंधित विकास कार्य बताए जा रहे हैं, जिन्हें गति दिलाने के लिए वे राजधानी भोपाल गए थे। स्पष्ट है कि दोनों नेताओं के बीच सरकार बनने के बाद से ही तल्खी रही है। पिछले दिनों सिंधिया समर्थक मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय का खुलकर विरोध और कमलनाथ का समर्थन किया था। दिग्विजय की मंत्रियों को लिखी चिट्ठी और हिसाब मांगना भी कमलनाथ को अखर गया था। जिसकी शिकायत उन्होंने नेतृत्व से की थी। सिंधिया और कमलनाथ की मुलाकात के बाद राज्य में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। कमलनाथ अध्यक्ष पद छोडऩे की बात पहले कह चुके हैं। ऐसे में सिंधिया या उनके किसी समर्थक का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आने पर कमलनाथ समर्थन कर सकते हैं।
दिल्ली में सोनिया गांधी से मिले अरुण यादव
उधर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। दोनों के बीच प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव के बाद से अरुण यादव अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।