डी.आर.डी.ओ. की ग्वालियर प्रयोगशाला अन्य प्रयोगशाओं के बीच एक नगीना – राजनाथ सिंह

ग्वालियर। ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन की भूमि है, जो कि अकबर के दरबार के नौ रत्नों में से एक थे। उसी तरह डी.आर.डी.ओ. की प्रयोगशाला अन्य प्रयोगशाओं के बीच एक नगीना है। ये बात देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान तथा विकास स्थापना ग्वालियर का भ्रमण करने के बाद वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज ग्वालियर प्रवास पर आए। अपने आगमन के तुरंत बाद वे शहर में स्थित रक्षा अनुसंधान तथा विकास स्‍थापना (डी.आर.डी.ई.) की प्रयोगशाला का भ्रमण करने पहुचे। इस अवसर पर उनकी आगवानी डॉ. जी. सतीश रेड्डी,सचिव, रक्षा अनुसंधान तथा अनुसंधान विभाग एवं अध्यक्ष डी.आर.डी.ओ., डॉ. ए. के. सिंह,महानिदेशक (जैवविज्ञान) तथा डी.आर.डी.ई. ग्‍वालियर के निदेशक डॉ. डी. के. दुबे ने की। इसके उपरांत डॉ. डी. के. दुबे निदेशक डी.आर.डी.ई.ग्‍वालियर ने रक्षा मंत्री को डी.आर.डी.ई.ग्‍वालियर की गतिविधियों से अवगत कराया तथा उनके समक्ष एक विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस मौके पर डी.आर.डी.ओ. के अध्यक्ष,महानिदेशक (जैवविज्ञान) एवं शीर्षस्थ वैज्ञानिकों के साथ समीक्षा बैठक में रक्षा मंत्री को डी.आर.डी.ई.ग्‍वालियर में चल रहे अनुसंधान प्रोजैक्‍टों की उपस्थित वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने जानकारी दी। इसके तुरंत बाद रक्षा मंत्री ने डी.आर.डी.ई.ग्‍वालियर द्वारा विकसित उत्‍पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रत्‍येक उत्‍पाद की कार्यप्रणाली के बारे में गहरी रुचि दिखाते हुए उपस्थित संबंधित वैज्ञानिकों से प्रश्‍न भी पूछे। इस अवसर पर डी.आर.डी.ई. के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जी. सतीश रेड्डी, सचिव,रक्षा अनुसंधान तथा अनुसंधान विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि रक्षा मंत्री ने कल ही एल.सी.ए. में उड़ान भरी है और आज वे डी.आर.डी.ओ. की एक जैवविज्ञान प्रयोगशाला के दौरे पर आए हैं। आगे उन्होंने बताया कि यह उनके द्वारा निरीक्षण की गयी डी.आर.डी.ओ. की दूसरी प्रयोगशाला है। उनके आगमन से डी.आर.डी.ई. के वैज्ञानिकों,अधिकारियों एवं कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि लेह के बाद यह ऐसी दूसरी प्रयोगशाला है जिसका भ्रमण रक्षा मंत्री ने किया है। जैवविज्ञान प्रयोगशाला होने के नाते इस प्रयोगशाला के कार्यकलाप का रक्षा सेनाओं के साथ-साथ नागरिक क्षेत्र में भी सीधा योगदान है। इसके पूर्व अपने उद्बोधन में डॉ. ए. के. सिंह,महानिदेशक (जैवविज्ञान) ने कहा कि देश की जी.डी.पी. में रसायन उद्योग की भागीदारी लगभग 2% है एवं डी.आर.डी.ई. के कार्यकलापों का इस उद्योग पर सीधा असर है। इस प्रकार डी.आर.डी.ई. देश की जी.डी.पी. बढ़ाने में सक्रिय रूप से निरंतर योगदान देती है। इसके बाद डी.आर.डी.ई. के वैज्ञानिकों ,अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डी.आर.डी.ई.ग्‍वालियर की कार्यप्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा कहा कि यह डी.आर.डी.ओ. की ऐसी दूसरी प्रयोगशाला है जिसके भ्रमण के लिए वे आये हैं।